चार्ल्स सोभराज: 1970 के दशक के बिकिनी किलर की खौफनाक कहानी

 लेखक: सत्य की गहराई से

प्रकाशन तिथि: 05 मार्च 2025

शब्द संख्या: ~3,800

परिचय: वो साँप जो इंसानों का शिकार करता था



1970 का दशक—एक ऐसा समय जब दुनिया "हिप्पी ट्रेल" के रंग में डूबी थी। यूरोप से लेकर दक्षिण एशिया तक फैला ये रास्ता साहसी युवाओं के लिए सपनों का सफर था। फूलों से सजे कपड़े, लंबे बाल, और आज़ादी की चाहत लिए ये यात्री भारत, नेपाल, थाईलैंड जैसे देशों में घूमते थे। लेकिन इसी भीड़ में छिपा था एक ऐसा शिकारी, जिसकी मुस्कान भरोसा देती थी और हाथ मौत बाँटते थे। उसका नाम था चार्ल्स सोभराज—एक सीरियल किलर, जिसे "बिकिनी किलर" और "द सर्पेंट" (साँप) जैसे नामों से जाना गया।

चार्ल्स ने कम से कम 20 लोगों की हत्या की—ज्यादातर पश्चिमी पर्यटक, जो अपने जीवन का सबसे खूबसूरत सफर जी रहे थे। उसकी चालाकी ऐसी थी कि वो बार-बार पुलिस के हाथों से फिसल जाता था। भारत में उसने 21 साल जेल में बिताए, नेपाल में 19 साल, और फिर भी उसकी कहानी खत्म नहीं हुई। 2022 में नेपाल से रिहा होकर वो फ्रांस लौट गया। लेकिन सवाल आज भी वही हैं—वो ऐसा क्यों करता था? क्या उसे कभी पछतावा हुआ? आइए, चार्ल्स सोभराज की पूरी कहानी को करीब से देखें—एक ऐसी कहानी जो डराती है, सोचने पर मजबूर करती है, और इंसानियत पर सवाल उठाती है।

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शुरुआती जीवन: टूटे हुए सपनों का बच्चा

चार्ल्स सोभराज का जन्म 6 अप्रैल 1944 को वियतनाम के साइगॉन (अब हो ची मिन्ह सिटी) में हुआ था। उसका असली नाम हॉटचंद भवानी गुरमुख सोभराज था। उसके पिता एक भारतीय व्यापारी थे, और माँ वियतनामी। लेकिन ये परिवार ज्यादा दिन साथ नहीं रहा। चार्ल्स के जन्म के बाद उसके माता-पिता अलग हो गए। उसकी माँ ने बाद में एक फ्रांसीसी सैनिक से शादी कर ली, और चार्ल्स को फ्रांस ले जाया गया। लेकिन वहाँ भी उसे वो प्यार और स्थिरता नहीं मिली, जिसकी एक बच्चे को जरूरत होती है।

फ्रांस में चार्ल्स एक बेकरार बच्चा बन गया। वो स्कूल से भागता, छोटी-मोटी चोरियाँ करता, और सड़कों पर भटकता। 19 साल की उम्र में उसे पहली बार जेल हुई—सशस्त्र डकैती के लिए। फ्रांस की कुख्यात पोइसी जेल में उसने अपराध की दुनिया को करीब से देखा। लेकिन ये सिर्फ शुरुआत थी। जेल से निकलने के बाद उसने अपने लिए एक नई पहचान बनाई—एक आकर्षक, बहुभाषी शख्स, जो लोगों को आसानी से अपने जाल में फँसा सकता था।

चार्ल्स की जिंदगी में एक खास मोड़ तब आया, जब उसने "हिप्पी ट्रेल" की ओर रुख किया। 1960 और 70 के दशक में ये रास्ता पश्चिमी युवाओं के लिए बेहद लोकप्रिय था। चार्ल्स ने सोचा—ये उसकी दुनिया है। वो यहाँ शिकार ढूँढेगा, और अपनी चालाकी से सबको चकमा देगा।


अपराध का पहला कदम: चोरी से हत्या तक

चार्ल्स का अपराधी जीवन छोटी चोरियों से शुरू हुआ। वो कारें चुराता, लोगों को ठगता, और उनकी पहचान हथियाता। लेकिन 1970 के दशक में उसने एक नया खेल शुरू किया—हत्या। उसका पहला शिकार माना जाता है एक पाकिस्तानी टैक्सी ड्राइवर, जिसे उसने 1970 में मार डाला। लेकिन असली खौफ तब फैला, जब उसने थाईलैंड में अपने कदम रखे।

थाईलैंड के बैंकॉक में चार्ल्स ने खुद को "अलैन गौटियर" नाम का रत्न व्यापारी बताया। वो रेशमी शर्ट पहनता, मगरमच्छ की चमड़े का बैग लिए घूमता, और अपनी कनाडाई प्रेमिका मैरी-एंड्री लक्लर्क को अपनी "पत्नी" के रूप में पेश करता। उसकी मुस्कान और बात करने का ढंग ऐसा था कि लोग उस पर भरोसा कर बैठते थे। लेकिन ये भरोसा उनकी जिंदगी की कीमत बन जाता था।

चार्ल्स का तरीका बेहद चालाक था। वो हिप्पी यात्रियों से दोस्ती करता। उन्हें अपने घर बुलाता, जहाँ वो उनके खाने-पीने में नींद की गोलियाँ या जहर मिला देता। जब वो बेहोश हो जाते, वो उनकी संपत्ति चुरा लेता—पासपोर्ट, पैसे, गहने। लेकिन कई बार वो इससे आगे बढ़ जाता। वो उन्हें मार डालता—कभी गला घोंटकर, कभी जहर देकर, कभी आग लगाकर।


बिकिनी किलर का उदय: 1975 का खूनी खेल

1975 में चार्ल्स की क्रूरता पूरी दुनिया के सामने आई। उसकी पहली मशहूर शिकार थी टेरेसा नॉल्टन—एक 21 साल की अमेरिकी लड़की, जो थाईलैंड के पटाया में बौद्ध मठ में शामिल होने जा रही थी। उसका शव समुद्र तट पर मिला—एक फूलों वाली बिकिनी में। इसी वजह से चार्ल्स को "बिकिनी किलर" कहा जाने लगा।

उसी साल उसने विटाली हकीम नाम के एक तुर्की नागरिक को मारा। उसका जला हुआ शव पटाया की सड़क पर मिला। चार्ल्स ने उसकी पहचान चुराई और आगे बढ़ गया। फिर आए डच यात्री हेनरिकस बिंतanja और कॉर्नेलिया हेमकर। चार्ल्स ने उन्हें जहर दिया, और जब वो जिंदा थे, उन्हें पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। उनके जले हुए शव नेपाल में मिले।

चार्ल्स का अगला शिकार था जीन-ल्यूक सोलोमन—एक फ्रांसीसी पर्यटक, जिसे उसने डकैती के दौरान जहर देकर मार डाला। उसकी लाश भारत में मिली। ये सिर्फ कुछ नाम हैं—चार्ल्स ने 1975 से 1976 के बीच कम से कम 12 हत्याएँ कीं, और संदेह है कि ये संख्या 20 से भी ज्यादा हो सकती है।


जाल में फँसते शिकार: उसकी चालाकी का रहस्य

चार्ल्स की सबसे बड़ी ताकत थी उसकी चालाकी। वो लोगों को बीमार करने में माहिर था। वो उन्हें नींद की गोलियाँ, उल्टी की दवाएँ, या जहर देता। फिर उनकी "देखभाल" करता, ताकि वो उस पर भरोसा करें। लेकिन जैसे ही मौका मिलता, वो उनका काम तमाम कर देता।

उसके साथ थी मैरी-एंड्री लक्लर्क, जो उसकी हर योजना में शामिल थी। वो चार्ल्स के जाल में फँसी थी—उसके प्यार में, या शायद उसके डर में। चार्ल्स की एक और खासियत थी उसकी पहचान बदलने की कला। वो अपने शिकार के पासपोर्ट चुराता और उनकी जगह ले लेता। इसीलिए उसे "द सर्पेंट" कहा गया—वो साँप की तरह फिसलन भरा था, जिसे पकड़ना नामुमकिन लगता था।


भारत में गिरफ्तारी: खेल का पहला अंत

1976 में चार्ल्स का खेल तब रुका, जब उसने दिल्ली में एक बड़ी गलती की। उसने फ्रांसीसी छात्रों के एक समूह को टूर गाइड बनकर ठगा। उसने उन्हें "पेचिश की दवा" के नाम पर जहर दे दिया। लेकिन दवा का असर जल्दी हो गया, और कुछ छात्रों ने पुलिस को बुला लिया। चार्ल्स और उसकी साथी बारबरा स्मिथ और मैरी एलन ईथर को पकड़ लिया गया।

पुलिस पूछताछ में स्मिथ और ईथर टूट गए। उन्होंने चार्ल्स के सारे राज़ खोल दिए। उसे 12 साल की सजा हुई—छात्रों को जहर देने और चोरी के लिए। लेकिन थाईलैंड में उस पर हत्या के कई मामले लंबित थे, जहाँ उसे फाँसी हो सकती थी। चार्ल्स ने एक चाल चली—1986 में उसने तिहाड़ जेल से भागने की कोशिश की। वो भागा, लेकिन जानबूझकर गोवा में पकड़ा गया। उसका मकसद था सजा को लंबा खींचना, ताकि थाईलैंड में 20 साल का स्टैच्यूट ऑफ लिमिटेशन खत्म हो जाए। उसकी चाल काम कर गई। 1997 में वो रिहा होकर फ्रांस लौट गया।


नेपाल में दूसरा पतन: 2003 की गिरफ्तारी

फ्रांस में चार्ल्स ने कुछ साल शांति से बिताए। वो पत्रकारों को सनसनीखेज इंटरव्यू देता और अपनी कहानी बेचता। लेकिन 2003 में उसने एक अजीब फैसला लिया—वो नेपाल चला गया। क्यों? कुछ कहते हैं वो अपनी शोहरत को फिर से जीना चाहता था।

काठमांडू के एक कैसिनो में उसे पत्रकार जोसेफ नाथन ने पहचान लिया। पुलिस ने उसे पकड़ लिया। 2004 में उसे अमेरिकी पर्यटक कॉनी जो ब्रॉन्ज़िच की 1975 की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा हुई। 2014 में उसे एक और हत्या—लॉरेंट कैरिएर की—के लिए दोषी ठहराया गया। चार्ल्स ने दावा किया कि वो निर्दोष है, लेकिन सबूतों ने उसकी बात को खारिज कर दिया।


जेल में चार्ल्स: एक अलग ही दुनिया

तिहाड़ जेल में चार्ल्स कोई आम कैदी नहीं था। वो वहाँ एक "सेलिब्रिटी" था। उसने जेल के गार्डों और कैदियों से दोस्ती कर ली। उसके पास टीवी था, अच्छा खाना था, और वो बाहर की दुनिया से जुड़ा रहता था। उसने अपनी कहानी लेखकों को बेची—जैसे रिचर्ड नेविल और जूली क्लार्क की किताब "द लाइफ एंड क्राइम्स ऑफ चार्ल्स सोभराज"।

नेपाल की जेल में भी उसने शादी कर ली—निहिता बिस्वास से, जो उसकी वकील की बेटी थी। निहिता ने बिग बॉस जैसे रियलिटी शो में हिस्सा लिया, और चार्ल्स की कहानी को जिंदा रखा।


रिहाई और विवाद: 2022 का नया अध्याय

2017 में हार्ट सर्जरी के बाद चार्ल्स ने नेपाल की सुप्रीम कोर्ट से रिहाई की गुहार लगाई। 21 दिसंबर 2022 को कोर्ट ने उसे उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया। 23 दिसंबर को वो फ्रांस लौट गया। लेकिन उसने कहा, "मैंने कभी किसी को नहीं मारा। मैं सिर्फ पासपोर्ट चुराता था, ठगी करता था।"

कई लोग मानते हैं कि वो झूठ बोल रहा है। थाईलैंड, भारत, और नेपाल में उसके खिलाफ सबूत हैं। लेकिन चार्ल्स आज भी खुद को "पीड़ित" बताता है। वो नेपाल सरकार पर मुकदमा करने की बात करता है।


समाज पर असर: एक सबक

चार्ल्स सोभराज की कहानी ने हिप्पी ट्रेल को डरावना बना दिया। पर्यटकों ने अजनबियों पर भरोसा करना छोड़ दिया। भारत और नेपाल में सुरक्षा सख्त हुई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है—क्या चार्ल्स सचमुच पकड़ा गया, या वो आज भी अपने खेल में माहिर है?


निष्कर्ष: साँप का अंत या नई शुरुआत?

चार्ल्स सोभराज—एक नाम, जो 1970 के सीरियल किलर की पहचान बन गया। उसकी बिकिनी किलर की कहानी डराती है, लेकिन साथ ही सोचने पर मजबूर करती है। क्या वो सिर्फ एक अपराधी था, या समाज की नाकामी का नतीजा? उसकी रिहाई के बाद भी सवाल बाकी हैं। शायद चार्ल्स का साँप अभी भी कहीं छिपा हो—नई चाल के साथ।

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