श्रद्धा वाकर मर्डर केस—यह नाम आज भी लोगों के जहन में एक दर्दनाक सिहरन पैदा करता है। यह एक ऐसी घटना है जिसने न केवल एक युवती की जिंदगी को खत्म किया, बल्कि समाज के सामने कई सवाल भी खड़े कर दिए। 27 साल की श्रद्धा वाकर की हत्या उसके 28 साल के लिव-इन पार्टनर आफताब अमीन पूनावाला ने 18 मई 2022 को दिल्ली में की थी। इस हत्याकांड की क्रूरता ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया—आफताब ने श्रद्धा का गला घोंटकर उसकी हत्या की, फिर उसके शरीर को 35 टुकड़ों में काटा, उन्हें 300 लीटर के फ्रिज में रखा और कई दिनों तक महरौली के जंगल में फेंकता रहा। यह लेख इस श्रद्धा वाकर हत्याकांड की पूरी कहानी को सामने लाता है—शुरुआत से लेकर आज तक का सफर, तथ्यों के साथ, भावनाओं के साथ, और समाज पर इसके प्रभाव के साथ। तो चलिए, इस दिल दहलाने वाली कहानी को शुरू से अंत तक समझते हैं।
श्रद्धा वाकर: एक साधारण लड़की की असाधारण कहानी
श्रद्धा वाकर का जन्म महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। वह अपने माता-पिता और भाई के साथ बड़ी हुई। उसकी स्कूली पढ़ाई वसई के एक कॉन्वेंट स्कूल में हुई, और बाद में उसने वीवा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, विरार में बैचलर ऑफ मास मीडिया (बीएमएम) कोर्स में दाखिला लिया। हालांकि, उसने यह कोर्स पूरा नहीं किया और बीच में ही छोड़ दिया। श्रद्धा एक मेहनती और सपने देखने वाली लड़की थी, जो अपने परिवार का सहारा बनना चाहती थी। उसका सपना था कि वह एक अच्छी नौकरी करे और अपने माता-पिता को गर्व महसूस कराए।
2018 तक श्रद्धा अपने परिवार के साथ वसई में रहती थी। लेकिन उसकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने सब कुछ बदल दिया। मलाड में एक मल्टीनेशनल कंपनी (एमएनसी) के कॉल सेंटर में नौकरी के दौरान उसकी मुलाकात आफताब अमीन पूनावाला से हुई। आफताब भी वसई का रहने वाला था और उसी कॉल सेंटर में काम करता था। दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो जल्द ही प्यार में बदल गई। 2019 में श्रद्धा ने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर आफताब के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का फैसला किया। यह रिश्ता अंतर्धार्मिक था, जिसके कारण उसके परिवार ने इसका कड़ा विरोध किया। लेकिन श्रद्धा ने अपने दिल की सुनी और घर छोड़ दिया। उस वक्त शायद उसे नहीं पता था कि यह फैसला उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा खतरा बन जाएगा।
आफताब पूनावाला: एक सामान्य चेहरा, छिपा हुआ अपराधी
आफताब अमीन पूनावाला भी वसई का रहने वाला था और एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखता था। उसने मुंबई के एल.एस. रहेजा कॉलेज से बीएमएम की डिग्री हासिल की थी। बाहर से देखने में वह एक सामान्य युवक था—शांत, पढ़ा-लिखा और मेहनती। लेकिन श्रद्धा के साथ उसका रिश्ता शुरू होने के बाद उसका असली चेहरा धीरे-धीरे सामने आने लगा। श्रद्धा के दोस्तों और परिवार ने बाद में बताया कि आफताब उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। श्रद्धा ने अपने कुछ करीबी दोस्तों से कहा था कि आफताब उस पर शक करता था, उसे मारता था और उसकी आजादी छीनने की कोशिश करता था।
यह सवाल उठता है कि श्रद्धा ने इस रिश्ते को क्यों जारी रखा? शायद वह प्यार में इतनी डूबी थी कि उसने इन खतरनाक संकेतों को नजरअंदाज कर दिया। या फिर उसे उम्मीद थी कि एक दिन आफताब बदल जाएगा। लेकिन यह उम्मीद उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुई।
18 मई 2022: वह काला दिन
रिश्ते में बढ़ता तनाव
श्रद्धा और आफताब 2022 की शुरुआत में दिल्ली शिफ्ट हो गए थे। वे दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके में एक किराए के फ्लैट में रह रहे थे। लेकिन उनका रिश्ता दिन-ब-दिन बिगड़ता जा रहा था। झगड़े आम बात हो गए थे। पुलिस जांच के अनुसार, श्रद्धा आफताब पर शादी के लिए दबाव डाल रही थी, जबकि आफताब इसके लिए तैयार नहीं था। इसके अलावा, आफताब का शक्की स्वभाव और हिंसक व्यवहार उनके बीच तनाव का बड़ा कारण था।
18 मई 2022 की सुबह उनके बीच फिर एक बड़ा झगड़ा हुआ। यह झगड़ा इतना बढ़ गया कि आफताब ने गुस्से में श्रद्धा का गला घोंट दिया। पुलिस का कहना है कि यह कोई आकस्मिक हत्या नहीं थी—यह एक सुनियोजित अपराध था। श्रद्धा की मौत के बाद आफताब ने जो किया, वह किसी भी इंसान के लिए कल्पना से परे है। उसने श्रद्धा के शरीर को 35 टुकड़ों में काट दिया। इसके लिए उसने एक आरा और चाकू का इस्तेमाल किया। फिर उसने इन टुकड़ों को एक 300 लीटर के फ्रिज में रखा, जिसे उसने खास तौर पर इस अपराध के लिए खरीदा था। अगले 18 दिनों तक, हर रात करीब 2 बजे, वह महरौली के जंगल में जाकर इन टुकड़ों को फेंकता रहा।
सबूत छिपाने की चालाकी
आफताब ने इस अपराध को छिपाने की पूरी कोशिश की। उसने श्रद्धा के इंस्टाग्राम अकाउंट को चलाना जारी रखा, ताकि लोगों को लगे कि वह जिंदा है। उसने अपने पड़ोसियों से भी सामान्य व्यवहार रखा, जिससे किसी को शक न हो। लेकिन उसकी यह चालाकी ज्यादा दिन तक नहीं चल सकी।
हत्या का खुलासा: छह महीने बाद सच्चाई सामने आई
श्रद्धा की हत्या मई 2022 में हुई, लेकिन यह मामला नवंबर 2022 तक सामने नहीं आया। दरअसल, श्रद्धा के पिता, विकास वाकर, को उसकी गुमशुदगी की खबर तब मिली जब श्रद्धा के दोस्तों ने बताया कि वे ढाई महीने से उससे संपर्क नहीं कर पा रहे थे। विकास ने पहले वसई पुलिस में शिकायत दर्ज की, लेकिन बाद में मामला दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया।
जांच शुरू होते ही पुलिस ने आफताब को हिरासत में लिया। शुरुआत में उसने झूठ बोला, लेकिन सख्त पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसने श्रद्धा की हत्या की और उसके शरीर के टुकड़े जंगल में फेंके। इस खुलासे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
पुलिस जांच: सबूतों का जाल बिछा
सबूतों की बरामदगी
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई की। आफताब के फ्लैट से कई अहम सबूत बरामद किए गए, जिनमें वह फ्रिज भी शामिल था जिसमें श्रद्धा के शरीर के टुकड़े रखे गए थे। पुलिस ने महरौली के जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया और वहां से श्रद्धा के शरीर के कुछ हिस्से मिले। डीएनए टेस्ट से पुष्टि हुई कि ये टुकड़े श्रद्धा के ही थे। इसके अलावा, हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार—आरा और चाकू—भी बरामद किए गए।
हत्या का मोटिव
पुलिस के अनुसार, श्रद्धा और आफताब के बीच शादी को लेकर लगातार तनाव था। श्रद्धा शादी करना चाहती थी, लेकिन आफताब इसके लिए तैयार नहीं था। इसके अलावा, आफताब का हिंसक व्यवहार और शक्की स्वभाव भी हत्या का कारण बना। श्रद्धा के दोस्तों ने बताया कि वह उसे बार-बार मारता था और उसकी आजादी पर पाबंदी लगाता था।
पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट
आफताब की कहानी में कई विरोधाभास थे, इसलिए पुलिस ने उसका पॉलीग्राफ टेस्ट करवाया। बाद में उसका नार्को टेस्ट भी हुआ, जिसमें उसने फिर से हत्या की बात कबूल की। हालांकि, नार्को टेस्ट का परिणाम कोर्ट में सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, लेकिन इसने जांच को सही दिशा दी।
कानूनी प्रक्रिया: इंसाफ की लंबी राह
गिरफ्तारी और चार्जशीट
आफताब को 12 नवंबर 2022 को गिरफ्तार किया गया। दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या, सबूत मिटाने और अन्य धाराओं में 3000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में सभी सबूतों, गवाहों के बयानों और फॉरेंसिक रिपोर्ट्स का जिक्र था। लेकिन कोर्ट में आफताब ने अपना गुनाह कबूल नहीं किया। उसने कहा कि उसने गुस्से में यह सब किया, जो उसकी पिछली स्वीकारोक्ति से अलग था।
कोर्ट में सुनवाई
2023 से यह केस दिल्ली की साकेत कोर्ट में चल रहा है। कई सुनवाइयां हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। श्रद्धा के पिता, विकास वाकर, ने आफताब के लिए फांसी की सजा की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी बेटी के साथ जो हुआ, उसके लिए सबसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। लेकिन भारत में कानूनी प्रक्रिया लंबी है, और इंसाफ का इंतजार अभी भी जारी है।
समाज पर प्रभाव: गुस्सा, डर और सवाल
जनता का आक्रोश
श्रद्धा वाकर मर्डर केस ने देश भर में गुस्सा फैला दिया। लोग सड़कों पर उतरे, और सोशल मीडिया पर #JusticeForShraddha ट्रेंड करने लगा। खास तौर पर महिलाओं ने इस मामले को अपने दिल के करीब पाया, क्योंकि यह उनकी सुरक्षा का सवाल था। जगह-जगह प्रदर्शन हुए, और लोग सरकार से सख्त कानून की मांग करने लगे।
लिव-इन रिश्तों पर बहस
इस घटना ने लिव-इन रिलेशनशिप्स पर भी सवाल उठाए। कई लोगों का मानना था कि ऐसे रिश्तों में कोई कानूनी सुरक्षा नहीं होती, जिसके कारण ऐसी घटनाएं होती हैं। केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने सुझाव दिया कि लिव-इन कपल्स को कोर्ट में रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए। लेकिन कई युवाओं ने इसे अपनी निजी आजादी पर हमला बताया। यह बहस आज भी जारी है।
महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
इस केस ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी। क्या एक लड़की अपने घर से बाहर सुरक्षित है? क्या उसे अपने पार्टनर पर भरोसा करना चाहिए? ये सवाल हर किसी के मन में उठे। सरकार ने वादा किया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए नए कानून बनाए जाएंगे, लेकिन धरातल पर कितना बदलाव आया, यह एक बड़ा सवाल है।
आज का परिदृश्य: 2025 में कहां है यह केस?
2025 में, श्रद्धा वाकर की कहानी अभी भी लोगों के दिलों में जिंदा है। उसका परिवार आज भी उस दर्द को झेल रहा है। विकास वाकर ने कई इंटरव्यू में कहा कि उनकी बेटी की याद उन्हें हर दिन सताती है। कानूनी प्रक्रिया अभी भी चल रही है, और कोर्ट का फैसला आने में समय लग सकता है। आफताब जेल में है, लेकिन क्या उसे सजा मिलेगी? यह सवाल अभी अनसुलझा है।
निष्कर्ष: एक अधूरी कहानी
श्रद्धा वाकर मर्डर केस सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है—यह एक युवती के सपनों, उसके रिश्तों और एक भयावह अपराध की गाथा है। यह हमें सोचने पर मजबूर करती है कि समाज में महिलाओं की जगह क्या है, और इंसाफ की राह कितनी लंबी हो सकती है। यह लेख लिखते वक्त मेरे मन में कई भावनाएं उमड़ीं—गुस्सा, दुख और एक उम्मीद कि शायद श्रद्धा को सच्चा इंसाफ मिले। आप क्या सोचते हैं? क्या यह केस समाज को बदलने की ताकत रखता है? अपनी राय जरूर साझा करें, क्योंकि यह कहानी हम सबके बीच की है।
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